कक्षा 10 विज्ञान – पाठ 8 अनुवांशिकता और जैव विकास (RCSCE Question Bank Solution 2024)

यहां पर आप राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड अजमेर द्वारा जारी किए गए एवं शाला दर्पण की सहायता से बनाए गए क्वेश्चन बैंक कक्षा 10 विज्ञान के पाठ 8 अनुवांशिकता और जैव विकास  मैं से पूछे जाने वाले सभी ऑब्जेक्टिव प्रश्न और लघु उत्तरात्मक प्रश्नों का जवाब देख सकते हैं, RBSE 10th science 2024 एवं राजस्थान बोर्ड कक्षा 10 की विज्ञान की परीक्षाओं के लिए यह सभी प्रश्न और उनके जवाब आपके लिए काफी फायदेमंद साबित होंगे, RCSCE Question Bank Solution 2024 Class 10th Science को यहां पर एक-एक करके डाला जा रहा है

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मंडल ने अनुवांशिकता के प्रयोग के लिए किस पौधे का चयन कियाउद्यान मटर
किसी जीव के एक भी विप्रयासी लक्षण के दोनों जिन एक साथ होने पर इसे क्या कहते हैंविषमयुग्मजी
संकरण TTxtt से प्राप्त संततियों का अनुपात क्या होगा1:1
मंडल ने अनुवांशिकता के प्रयोग में मटर के कितने जोड़ी विप्रयासी लक्षण का अध्ययन किया7
मंडल ने मटर के पुष्प के रंग के लक्षण का एक संकर संकरण करवाया तो F1 संतति पीढ़ी में तीन फूल गुलाबी  और एक फूल सफेद प्राप्त हुआ । प्रभावित कारक मटर के पौधे के पुष्प का रंग क्या होगागुलाबी
मंडल के एक प्रयोग में लंबे मटर के पौधे जिनमें बैंगनी पुष्प थे उनका संकरण बन पौधे जिनमें सफेद फूल थे उनसे करवाया गया इसे प्राप्त सभी पौधों में पुष्प बैंगनी रंग के थे लेकिन आधे बोने थे इसे कहा जा सकता है कि जनक पौधों की आनुवंशिक रचना यह रही होगीTtWW

आनुवंशिकता की मूल भौतिक और कार्यात्मक इकाई जीन है।

F2 पीढ़ी में बीजों के जीन प्रारूप का अनुपात 9:3:3:1 है, लक्षण प्रारूप 3:1

मेण्डल का प्रभाविता का नियम- जब एक जोड़ी विपर्यासी लक्षणों वाले पौधों के बीच संकरण कराया जाता है तो प्रथम पीढ़ी में केवल एक प्रभावी लक्षण ही प्रकट होता है, दूसरा छिप जाता है। इसे प्रभाविता का नियम कहते हैं

मटर का पौधा आसानी से सर्वत्र उगाया जा सकता है। (1) मटर का पौधा वार्षिक तथा अल्पकालिक जीवन चक्र वाला होता है। (2) मटर के पष्प द्विलिंगी होते हैं तथा पौधे मुख्यतः स्वःपरागित होते हैं। (4) मटर के पौधों में अनेक विरोधी गुण पाये जाते हैं। (5) मटर में कृत्रिम रूप से परपरागण द्वारा आसानी से संकरण कराया जा सकता है |

पृथक्करण का नियम – इस नियम के अनुसार जब दो विपरीत लक्षणों वाले शुद्ध नस्ल के एक ही जाति के दो पौधों या जनकों के बीच संकरण कराया जाता है , तो उनकी F1 पीढ़ी में संकर पौधे प्राप्त होते है और सिर्फ प्रभावी लक्षण को ही प्रकट करते है।

यह नियम दर्शाता है कि जब किसी संकर में लक्षणों के दो contrasting pairs लिए जाते हैं तो किसी एक जोड़े का लक्षण-विसंयोजन दूसरे जोड़े से स्वतंत्र होता है । दोनों जोड़े (pairs) के लक्षण स्वतंत्र रूप से प्रकट होते हैं। वे एक दूसरे पर अपना प्रभाव नहीं डालते हैं। इसका फिनोटाइप अनुपात 9:3:3:1 होता है।

उपार्जित लक्षणें से जनन-कोशिकाओं के DNA में कोई परिवर्तन नहीं होता इसलिए उनकी वंशागति नहीं होती।

गुणसूत्रों की सरचना (structure ) में परिवर्तन के फलस्वरूप (Due to chromosomal aberration ) – गुणसूत्रों की संरचना में परिवर्तन के जीवों में विविधता पैदा होती है| जीन की आण्विक संरचना में परिवर्तन के कारण भी आनुवंशिक विभिन्नता पैदा होती है | लैंगिक जनन के समय होने वाले जीन विनिमय (Crossing over ) के कारण जीन पुनर्योजन (Gene recombination ) तथा निषेचन के समय दो युग्मकों के मिलने कारण भी आनुवंशिक विभिन्नता पैदा होती है |

वंशागत लक्षण वे लक्षण होते हैं जो व्यक्ति को अपने पूर्वजों से प्राप्त होते हैं। उपार्जित वर्ण वे लक्षण हैं जो एक व्यक्ति अपने जीवनकाल में प्राप्त करता है। जनन कोशिकाओं के DNA में परिवर्तन के कारण ये लक्षण विकसित होते हैं, इसलिए ये एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में पारित होते हैं।

मनुष्य में 23 जोड़े क्रोमोसोम होते हैं। इनमें 22 जोड़े क्रोमोसोम एक ही प्रकार के होते हैं, जिसे ऑटोसोम (autosomes) कहते हैं। तेईसवाँ जोड़ा भिन्न आकार का होता है, जिसे लिंग-क्रोमोसोम कहते हैं। ये दो प्रकार के होते हैं-X और Y.X क्रोमोसोम अपेक्षाकृत बहुत छोटे आकार का होता है। नर में X और Y दोनों लिंग-क्रोमोसोम मौजूद होते हैं, पर मादा मेंY क्रोमोसोम लिंग-क्रोमोसोम के रूप में होते हैं। ये X और Y क्रोमोसोम ही मनुष्य में लिंग-निर्धारण (sex determination) के लिए उत्तरदायी (responsible) होते हैं।

युग्मकों (gamates) के निर्माण के समय X और Y अलग-अलग युग्मकों में चले जाते हैं। अत: नर में X और Y दो प्रकार के युग्मक बनते हैं, पर मादा में केवल X क्रोमोसोम वाले ही युग्मक बनते हैं। इन युग्मकों के निषेचन के फलस्वरूप नर एवं मादा बनते हैं। जिस युग्मनज (zygote) में X, Y दोनों क्रोमोसोम पहुँच जाते हैं, वह नर (male) बन जाता है और जिसमें दोनों लिंग क्रोमोसोम X,X पहुंच जाते हैं वह मादा (female) बन जाता है। 

एक संकर क्रॉस एक विधि है जिनके अनुसार दो अलग अलग प्रजाति के माता पिता से उत्पन्न संतान में दोनों के गुण होते हैं। 

मेंडल ने मटर के पौधों के अनेक विपर्यासी विकल्पी लक्षणों का अध्ययन किया। उन्होंने पाया कि विपर्यासी (विकल्पी) लक्षणों वाले पौधों के स्वपरागण के द्वारा जनन के फलस्वरूप प्रथम पीढ़ी F1 में केवल एक ही लक्षण प्रदर्शित हुआ और दूसरा लक्षण प्रदर्शित नहीं हुआ। इससे यह सिद्ध होता है कि लक्षण प्रभावी अथवा अप्रभावी होते हैं।

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