कक्षा 10 विज्ञान – पाठ 7 जीव जनन कैसे करते हैं (RCSCE Question Bank Solution 2024)

यहां पर आप राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड अजमेर द्वारा जारी किए गए एवं शाला दर्पण की सहायता से बनाए गए क्वेश्चन बैंक कक्षा 10 विज्ञान के पाठ 7 जीव जनन कैसे करते हैं  मैं से पूछे जाने वाले सभी ऑब्जेक्टिव प्रश्न और लघु उत्तरात्मक प्रश्नों का जवाब देख सकते हैं, RBSE 10th science 2024 एवं राजस्थान बोर्ड कक्षा 10 की विज्ञान की परीक्षाओं के लिए यह सभी प्रश्न और उनके जवाब आपके लिए काफी फायदेमंद साबित होंगे, RCSCE Question Bank Solution 2024 Class 10th Science को यहां पर एक-एक करके डाला जा रहा है

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इन प्रश्नों को यहां पर देखने के साथ-साथ आप इन्हें यूट्यूब पर भी देख सकते हैं जिसका पूरा वीडियो आपको नीचे दिए गए बटन पर क्लिक करने के बाद मिल जाएगा, इस यूट्यूब चैनल पर आपको राजस्थान बोर्ड की प्रत्येक कक्षाओं से जुड़े वीडियो मिल जाएंगे इसीलिए आप इसे जरूर सब्सक्राइब करें समय

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रिक्त स्थानों की पूर्ति करें

ब्रायोफिलम की पत्तियों पर विकसित के द्वारा कायिक जनन होता हैकालीका
परागकण पुष्प के कौन से भाग में बनते हैंपराग कोष
फलफल
कायिक जनन से उत्पन्न सभी पौधे आनुवंशिक रूप से जनक पौधे के समान होते हैंएक
भ्रूण को मां के रुधिर से पोषण किसके द्वारा मिलता हैअपरा
किसी स्पीशीज की समझने के स्थायित्व के लिए कौन सी आवश्यक क्रिया हैजनन
अलैंगिक जनन मुकुलन द्वारा होता हैयीस्ट में
बीजाणु समासंघ द्वारा जनन होता हैराइजोपस
उभय लैंगिक पुष्प कौन सा हैगुड़हल और सरसों
पुष्प के स्त्रीकेसर में होते हैंवर्तिकअागरा, वर्तिका, अंडाशय
बहू खंडन द्वारा जनन होता हैप्लाज्मोडियम
वृषण उधर गुहा के बाहर वृषण कोष में स्थित होते हैं क्योंकि शुक्राणु उत्पादन के लिए आवश्यक तापमान शरीर के तापमान सेकम होता है
मानव में निषेचन की क्रिया मादा जनन तंत्र के किस भाग में संपन्न होती हैअंड वाहिनी
महिलाओं के शरीर में कौन सा परिवर्तन जनन प्रावस्था के प्रारंभ को और परिपक्वता को दिखाता हैऋतुसत्राव होना
पुष्पीय पादप में निषेचन के बाद भ्रूण का विकास कहां पर होता हैबीजांड

पुंकेसर के परागकोष से पुष्प के जायांग की वर्तिकाग्र पर परागकणों के स्थानान्तरण को परागण कहते हैं ।

स्व परागण तब होता है जब एथेर से पराग एक ही फूल, या उसी पौधे के दूसरे फूल के कलंक पर जमा होता है। पार-परागण एक फूल के परागकोष से एक ही प्रजाति के एक अलग व्यक्ति पर दूसरे फूल के कलंक से पराग का हस्तांतरण है।

शुक्राणु का निर्माण पुरुष के अंडकोष में होता है।

मुकुलन, जीव विज्ञान में, अलैंगिक प्रजनन का एक रूप जिसमें एक नया व्यक्ति मूल जीव के कुछ सामान्य शारीरिक बिंदु से विकसित होता है।  अलैंगिक जनन की इस विधि में कोशिका के किसी भाग में एक बल्ब जैसा उभार बनता है। कोशिका का केन्द्रक दो भागों में यह विभाजित हो जाता है और एक भाग इस बल्ब में आ जाता है । यह बल्ब जैसी रचना मूल कोशिका से अलग हो जाती है। अब इसे मुकुल कहते हैं। यीस्ट कोशिका एवं बहुकोशिय जंतु हाइड्रा में इस विधि द्वारा अलैंगिक जनन होता है।

1. गर्भनिरोधक गोलियां, कॉपर टी , कंडोम, ट्यूबेक्टमी, वासेक्टोमी

गोनोरिया, एचआईवी एड्स, मासा, सिफ़लिस , सुजाक

अंडे के निषेचन नहीं होने की स्थिति में परत धीरे-धीरे टोटकारी योनि मार्ग से रुधिर और म्यूकस के रूप में निष्कासित होती है, यह प्रक्रिया लगभग 1 महीने तक चलती है इस ऋतु स्त्राव या रजोधर्म कहा जाता है

अमीबा में द्विखण्डन विधि में सर्वप्रथम कोशिका द्रव मे वृद्धि होती है और फिर केन्द्रक का आकार बढ़ता है तथा केद्रक ओर कोशिका द्रव विभाजित होकर दो भागों में विभाजित हो जाते है ओर दो जंतुओं का निर्माण हो जाता है !

गर्भस्थ शिशु को माता के शरीर से जोड़नेवाले नाल को अपरा (placenta) कहते हैं। यह एक विशेष संरचना होती है जो तस्करी नुमा होती है गर्भाशय की मिट्टी में दासी हुई होती है भ्रूण को मां के रुधिर से ही पोषण मिलता है, इसका मुख्य कार्य मादा के शरीर के रक्त को शिशु के शरीर में पहुँचाना है, जिससे शिशु की पोषण, श्वसन आदि क्रियाएँ संपन्न होती हैं।

प्लेनेरिया जैसे सरल प्राणियों को यदि कई टुकड़ों में काट दिया जाए तो प्रत्येक टुकड़ा विकसित होकर पूर्ण जीव का निर्माण कर देता है। यह पुनरूद्भवन कहलाता है। पुनरूद्भवत (पुनर्जनन) विशिष्ट कोशिकाओं द्वारा सम्पादित होता है। इन कोशिकाओं के क्रम प्रसरण से अनेक कोशिकाएँ बन जाती हैं।

यह एक पौधे के अलैंगिक प्रजनन का एक रूप है जिसमें एक नया पौधा तनों, जड़ों और पत्तियों से विकसित होता है। कायिक प्रवर्धन प्राकृतिक हो सकता है और कृत्रिम रूप से भी किया जा सकता है।

(1) सभी नये पौधे मातृ पौधे के समान होते हैं। इस प्रकार एक अच्छे गुणों वाले पौधे से कलम द्वारा उसके समान ही अनेक पौधे तैयार किये जाते हैं।
(2) फलों द्वारा उत्पन्न सभी बीज समान नहीं होते परंतु कायिक जनन द्वारा उत्पन्न पौधों में पूर्ण समानता होती है।
(3) कायिक जनन द्वारा नये पौधे थोड़े समय में ही प्राप्त हो जाते हैं।
(4) वे पौधे जो बीज द्वारा सरलता से प्राप्त नहीं किए जा सकते, कायिक जनन द्वारा प्राप्त किये जा सकते हैं। केला, अंगूर, संतरे आदि की खेती इस प्रकार की जाती है।

अनेक सरल बहुकोशिकीय जीवों में भी विशेष जनन संरचनाओं पाई जाती है राइजोपस नमक कटक में उर्दू तंतुओं पर सूक्ष्म गोल संरचनाओं जनन प्रक्रिया में भाग लेती है जिम विशेष कोशिकाएं या बीजाणु पाए जाते हैं और यह बीजाणु वृद्धि करके राइजोपस के नए जीव पैदा करते हैं, इस जनन की विधि में नई पीढ़ी का सृजन केवल अकाल जीव द्वारा होता है इसे अलैंगिक जनन कहते हैं

कायिक प्रवर्धन, यह पद्धति कैलाश संतरा गुलाब और चमेली ऐसे पौधों को उगाने के लिए उपयोग की जाती है इसमें उत्पन्न सभी पौधे आनुवंशिक रूप से जनक पौधे के समान होते हैं

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