कक्षा 10 विज्ञान – पाठ 10 मानव नेत्र और रंग बिरंगा संसार (RCSCE Question Bank Solution 2024)

यहां पर आप राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड अजमेर द्वारा जारी किए गए एवं शाला दर्पण की सहायता से बनाए गए क्वेश्चन बैंक कक्षा 10 विज्ञान के पाठ 10 मानव नेत्र और रंग बिरंगा संसार  मैं से पूछे जाने वाले सभी ऑब्जेक्टिव प्रश्न और लघु उत्तरात्मक प्रश्नों का जवाब देख सकते हैं, RBSE 10th science 2024 एवं राजस्थान बोर्ड कक्षा 10 की विज्ञान की परीक्षाओं के लिए यह सभी प्रश्न और उनके जवाब आपके लिए काफी फायदेमंद साबित होंगे, RCSCE Question Bank Solution 2024 Class 10th Science को यहां पर एक-एक करके डाला जा रहा है

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इन प्रश्नों को यहां पर देखने के साथ-साथ आप इन्हें यूट्यूब पर भी देख सकते हैं जिसका पूरा वीडियो आपको नीचे दिए गए बटन पर क्लिक करने के बाद मिल जाएगा, इस यूट्यूब चैनल पर आपको राजस्थान बोर्ड की प्रत्येक कक्षाओं से जुड़े वीडियो मिल जाएंगे इसीलिए आप इसे जरूर सब्सक्राइब करें

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OBJECTIVE QUESTIONS

मानव नेत्र में किसी वस्तु का प्रतिबिंब कहां पर बनता हैदृष्टि पटल
नेत्र की लेंस की फोकस दूरी किसके द्वारा समायोजित होती हैपक्ष में भी पेशियां
अंतिम पंक्ति में बैठे किसी छात्र को ब्लैक बोर्ड पढ़ने में कठिनाई होती है यह विद्यार्थी किस दोष से पीड़ित हैनिकट दृष्टि दोष
मानव नेत्र में निकटतम बिंदु कौन सा है25 सेंटीमीटर
जरा दूर दृष्टिता का निवारण किस लेंस से किया जाता हैद्विफोकसी लेंस
मानव नेत्र में पुतली के आकार को नियंत्रित करता हैपरितारिका
मानव नेत्र के रेटिना पर बनने वाले प्रतिबिंब की प्रकृति कैसी होती हैवास्तविक उल्टी और छोटी

लघुतरात्मक प्रश्न

निकट बिंदु 25 cm दूर-बिंदु अनंत दूरी पर

निकट-दृष्टि दोष का निवारण अवतल लेंस , दूर दृष्टि दोष  का निवारण ‘उत्तल लेंस’ का प्रयोग

कॉर्निया

कॉर्निया 

4-6 घंटे से अधिक का समय नहीं होना चाहिए

परितारिका

वायुमंडलीय अपवर्तन 

वायुमंडल में धूल तथा जल के अनगिनत कण उपस्थित होते हैं, ये कण नीले रंग के प्रकाश का प्रकीर्णन करते है , क्योंकि इस रंग का तरंगदैर्ध्य सबसे कम होता है। अतः आकाश का रंग नीला दिखाई देता है

प्रकाश का प्रकीर्णन जिसकी वजह से अग्रिम सूर्योदय व विलंबित सूर्यास्त होता है।

जब कोई वस्तु प्रकाश के सभी रंगों को अवशोषित कर लेती है तो वह वस्तु हमें काली दिखाई देती है  एक काली वस्तु सभी रंगों को समान रूप से अवशोषित करती है और किसी को भी परावर्तित नहीं करती है, इसलिए वह हमें काली दिखती है।

चूंकि वहां न तो वायुमंडल है और न ही प्रकाश का प्रकीर्णन हो पाता है

सूर्य की किरणें वर्षा की बूँदों से अपवर्तित तथा परावर्तित होने के कारण इन्द्रधनुष बनाती हैं। इंद्रधनुष सदा दर्शक की पीठ के पीछे सूर्य होने पर ही दिखाई पड़ता है। यह तब बनता है जब सूर्य का प्रकाश बारिश की बूंदों से होता हुआ दर्शक के सामने एक सटीक कोण (42°) पर पड़ता है. पानी की बूंद में प्रवेश करने वाला प्रकाश सबसे पहले अपवर्तित होता है और फिर पीछे से वापस परावर्तित होता है

नेत्र की समंजन क्षमता, वह क्षमता होती है जिसके कारण आँख अपनी फोकस दूरी को समयोजित करके निकट और दूर की वस्तुओं को रेटिना पर फोकस करता है

(i) निकट दृष्टि दोष , (ii) अवतल |

जब लेंस क्लाउडी हो जाता है तो लाइट लेंसों से स्पष्ट रूप से गुजर नहीं पाती जिससे जो इमेज आप देखते हैं वो धुंधली हो जाती है। इसके कारण दृष्टि के बाधित होने को मोतियाबिंद या सफेद मोतिया कहते हैं।

इसका दर्शाने के लिए एक क्राउन ग्लास का प्रिज्म लेते हैं उसको सूर्य की ओर इस ढंग से व्यवस्थित करते हैं कि दूसरी ओर पटल पर किरणें विच्छेपित होकर पड़े। पर्दे पर सात रंग की पट्टी स्पष्ट रूप से दिखाई पड़ती है। इससे प्रमाणित होता है कि सूर्य सात रंगों का सम्मिश्रण है। यह रंग बैंगनी, नीला, आसमानी, हरा, पीला, नारंगी, लाल है

VIBGYOR बैंगनी (V), जामुनी (I), नीला (B), हरा (G), पीला (Y), नारंगी (O) तथा लाल (R) इसे वैजानीहपीनाला (VIBGYOR)।

U= -infinite , v = -80cm , using lens formulla, 1/(-80) – 1/ (-infinite) = 1/f, here f = -0.80m then P = 1/f & P = -1.25D (here – sign अवतल लेंस )

निकट दृष्टि दोष में, प्रकाश रेटिना पर के बजाय, के सामने केंद्रित होता है। इससे दूर की वस्तुएँ धुंधली हो जाती हैं और निकट की वस्तुएँ सामान्य दिखाई देती हैं। इस दोष के निवारण के लिए अवतल लेंस का प्रयोग किया जाता है।

दीर्घ-दृष्टि दोष – वह दृष्टि दोष जिसके कारण कोई व्यक्ति दूर की वस्तुओं को स्पष्ट रूप देख सकता है परन्तु वह निकट रखी वस्तुओं को स्पष्ट नहीं देख पाता है। दीर्घ दृष्टि दोष कहलाता है। इस स्थिति में प्रतिबिंब दृष्टिपटल के पीछे बनता है।

दीर्घ दृष्टि दोष के कारण – .
(i) अभिनेत्र लेंस की फ़ोकस दूरी का अत्यधिक हो जाना।
(ii) नेत्र गोलक का छोटा हो जाना।
संशोधन (निवारण)- इस दोष को दूर करने के लिए उत्तल लेंस के चश्में का उपयोग किया जाता है।

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