Chapter 3 जाति धर्म और लेंगीक मसले Class 10th SST Loktantrik Rajneeti Book (RCSCE Question Bank 2024 Answer Key)

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वस्तुनिष्ठ प्रश्न

1. महिलाओं की साक्षरता की वर्तमान प्रतिशत दर है –

(अ) 54% (ब) 64% (स) 50% (द) इनमें से कोई नहीं ( )

2. हमारे देश में लिंगानुपात है –

(अ) 818 (ब) 919 (स) 717 (द) 616 ( )

3. 2019 में पहली बार महिला सांसदों का प्रतिशत है –

(अ) 13.36% (ब) 15.3% (स) 14.36% (द) 16.66% ( )

4. 2011 में देश की आबादी में अनुसूचित जातियों का हिस्सा है –

(अ) 16.6% (ब) 15.5% (स) 14.4% (द) 13.3% ( )

5. 2011 की जनगणना के अनुसार हिन्दुओं की आबादी प्रतिशत है –

(अ) 60% (ब) 70% (स) 79.8% (द) 80% ( )

6. 2011 की जनगणना के अनुसार निम्न में से किस धार्मिक समुदाय की आबादी सर्वाधिक है –

(अ) सिक्ख (ब) बौद्ध (स) मुस्लिम (द) जैन ( )

7. भारत में महिलाओं के लिए आरक्षण की व्यवस्था है –

(अ) राज्यसभा में (ब) लोकसभा में (स) विधानसभा में (द) पंचायती राज की संस्थाएँ ( )

8. औरतों के साथ अभी भी कई तरह के ……………………… होते है। (भेदभाव)

9. भारत के अनेक हिस्सों में मां-बाप को सिर्फ ……………………… चाह होती है। (बेटे की)

10. शहरी इलाके तो ……………………… के लिए खास तौर पर असुरक्षित है। (महिलाओं)

11. समस्याएँ तब शुरू होती है जब ……………………… को राष्ट्र का आधार मान लिया जाता है। (धर्म)

12. साम्प्रदायिक आधार पर राजनीतिक ……………………… साम्प्रदायिकता का दूसरा रूप है। (गोलबंदी)

अति लघुत्तरात्मक प्रश्न-

1. लिंगानुपात से आप क्या समझते है?लिंगानुपात का उपयोग प्रति 1000 पुरुषों पर महिलाओं की संख्या का वर्णन करने के लिए किया जाता है ।
2. 2011 की जनगणना के अनुसार लिंगानुपात कितना है?943
3. 2019 के लोकसभा निर्वाचन में महिला सांसदों की संख्या कितने प्रतिशत है?14.36
4. 2011 की जनगणना के अनुसार अनुसूचित जन-जातियों का हिस्सा कितना फीसदी था?2011 की जनगणना के अनुसार, अनुसूचित जनजातियों की संख्या 104 मिलियन है, जो देश की 8.6% आबादी का प्रतिनिधित्व करती है
5. ‘‘वोट बैंक’’ से आप क्या समझते है?जब कोई राजनीतिक दल कुछ ऐसी नीतियाँ अपनाता है कि मतदाताओं का एक विशेष समूह या समुदाय उस राजनीतिक दल को भारी मात्रा में मत देता है, या वह दल यह मानने लगता है कि उस समूह का वोट हर हालत में उसे ही मिलेगा, तो इसे ही ‘वोट बैंक की राजनीति’ कहते हैं और उस समुदाय या समूह को उस दल का ‘वोट बैंक’ कहा जाता है।
6. किन्हीं दो प्रावधानों का जिक्र करें जो भारत को धर्मनिरपेक्ष बनाते है?सरकार के पक्ष में या किसी भी धर्म के खिलाफ भेदभाव नहीं करना चाहिए। यह बराबर सम्मान के साथ सभी धर्मों का सम्मान करना होगा। सभी नागरिकों, चाहे उनकी धार्मिक मान्यताओं के लिए कानून के सामने बराबर हैं। कोई धार्मिक अनुदेश सरकार या सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों में दिया जाता है।
7. गरीबी रेखा से नीचे जीवन बसर करने वाले लोगों से आप क्या समझते है?अगर किसी व्यक्ति की आय राष्ट्रीय औसत आय के 60 फीसदी से कम है, तो उस व्यक्ति को गरीबी रेखा के नीचे जीवन बिताने वाला माना जा सकता है। उदाहरण के लिए माध्य निकालने का तरीका। यानी 101 लोगों में 51वां व्यक्ति यानी एक अरब लोगों में 50 करोड़वें क्रम वाले व्यक्ति की आय को औसत आय माना जा सकता है।
8. ‘‘आर्थिक असमानता’’ से आशय स्पष्ट कीजिए।आर्थिक असमानता किसी व्यक्तियों के समूह, आबादी के समूहों या देशों के बीच, स्थित आर्थिक अंतर को दर्शाता है।

लघुत्तरात्मक प्रश्न

1. 2011 की जनगणना के अनुसार पुरूष और महिला साक्षरता कितनी है?देश में साक्षरता दर पुरुषों के लिए 74.04 फीसदी, 82.14 और महिलाओं के लिए 65.46 है।
2. लैंगिक असमानता का आधार क्या है?लैंगिक असमानता का तात्पर्य लैंगिक आधार पर महिलाओं के साथ भेदभाव से है। परंपरागत रूप से समाज में महिलाओं को कमज़ोर वर्ग के रूप में देखा जाता रहा है। वे घर और समाज दोनों जगहों पर शोषण, अपमान और भेदभाव से पीड़ित होती हैं। महिलाओं के खिलाफ भेदभाव दुनिया में हर जगह प्रचलित है।
3. जाति और राजनीति में क्या संबंध है?राजनीति में प्रधान जाति की भूमिका का विश्लेषण किया जा सकता है। प्रधान जाति न केवल राजनीतिक और आर्थिक दृष्टि से ही शक्तिशाली होती है, बल्कि संख्या में भी गांव या इलाके में ज्यादा होती है। प्रधान जाति अपने संख्या बल के आधार पर गाँव और क्षेत्र की स्थानीय संस्थाओं जैसे पंचायतों की राजनीति में सक्रिय होती है।
4. वर्ण-व्यवस्था से आप क्या समझते है?वर्ण व्यवस्था स्तरीकरण की एक सामाजिक प्रणाली है जो समाज को उनकी सामाजिक और आर्थिक क्षमताओं के आधार पर विभिन्न स्तरों में विभाजित करती है।
5. ‘अनुसूचित जाति’ व ‘अनुसूचित जनजाति’ के नाम के आगे ‘‘अनुसूचित’’ शब्द क्यों लगाया जाता है?भारत की जनगणना दो सामाजिक समूहों की गणना करती है: अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति। इन दोनों व्यापक समूहों में सैकड़ों जातियाँ या जनजातियाँ शामिल हैं जिनके नाम एक आधिकारिक अनुसूची में सूचीबद्ध हैं। इसलिए उनके नाम में ‘अनुसूचित’ उपसर्ग लगा।
6. शहरीकरण से आप क्या समझते है?शहरीकरण, वस्तुतः शहरी बन जाने; शहरों का स्थानांतरण हो जाने; कृषि से शहरों में आम अन्य पेशों, जैसे व्यापार, विनिर्माण, उद्योग एवं प्रबंधन की ओर चले जाने; और व्यवहार प्रतिमान के अनुकूल परिवर्तनों संबंधी प्रक्रिया है।
7. ‘‘सार्वभौमिक व्यस्क मताधिकार’’ से आप क्या समझते है?सर्वजनीन मताधिकार (अथवा सार्वभौमिक मताधिकार) सभी वयस्क नागरिकों को मताधिकार देता है, भले ही धन, आय, लिंग, सामाजिक स्थिति, प्रजाति, जातीयता, राजनीतिक रुख, या कोई अन्य प्रतिबंध, केवल अपेक्षाकृत मामूली अपवादों के अधीन हो।
1. गांधीजी के अनुसार धर्म क्या है?“धर्म नहीं, ग्रंथ नहीं, मान्यताएं-परंपराएं नहीं, स्वामी-गुरु-महंत-महात्मा नहीं, सत्य और केवल सत्य! सत्य को खोजना, सत्य को पहचानना, सत्य को लोक-संभव बनाने की साधना करना और फिर सत्य को लोकमानस में प्रतिष्ठित करना
2. ‘‘पित्र प्रधान समाज’’ से आप क्या समझते है?पितृ प्रधान समाज का अर्थ एक ऐसे समाज से है जिसमें पुरुष प्राथमिक शक्ति रखते हैं। इस प्रकार के समाज में, सामाजिक विशेषाधिकार, नैतिक अधिकार, राजनीतिक नेतृत्व और संपत्ति का नियंत्रण पुरुष के पास होता है
3. पारिवारिक कानून से क्या अभिप्राय है?परिवारी कानून वो कानून होता है जो परिवार से सम्बंधित मामिलों से डील करते हैं जैसे, शादी, तलाक़, जायदाद आदि
4. साम्प्रदायिकता से आप क्या समझते है?अपने चरम रूप में, सांप्रदायिकता इस विश्वास की ओर ले जाती है कि विभिन्न धर्मों के लोग एक राष्ट्र के भीतर समान नागरिक के रूप में नहीं रह सकते। इस मानसिकता के अनुसार या तो एक समुदाय के लोगों को दूसरे के वर्चस्व में रहना होगा या एक भिन्न राष्ट्र बनाना होगा।
5. धर्म निरपेक्ष शासन से आप क्या समझते है?धर्मनिरपेक्षता का अर्थ किसी के धर्म का विरोध करना नहीं है बल्कि सभी को अपने धार्मिक विश्वासों एवं मान्यताओं को पूरी आज़ादी से मानने की छूट देता है। धर्मनिरपेक्ष राज्य में उस व्यक्ति का भी सम्मान होता है जो किसी भी धर्म को नहीं मानता है।
6. ‘‘नारीवाद आंदोलन’’ से आप क्या समझते है?नारीवाद एक आन्दोलन, संघर्ष, और विमर्श के रुप में यह प्रयास करता है कि महिलाओं को भी समान मनुष्य माना जाए और उनकी गरिमा, स्वतंत्रता, समानता उनके जैविक आधार पर न होकर उनके व्यक्ति रुप में होनी चाहिए ।
7. ‘‘भारत में महिलाओं का प्रतिनिधित्व बहुत कम है’’। अपने विचार लिखिए।राजनीति और नौकरशाही में महिलाओं का प्रतिनिधित्व कम क्यों है? भारत एक गहन पितृसत्तात्मक समाज है और महिलाओं को प्रायः पुरुषों से हीन माना जाता है। यह मानसिकता समाज में गहराई तक समाई हुई है और महिलाओं की राजनीति में नेतृत्व एवं भागीदारी की क्षमता के संबंध में लोगों की सोच को प्रभावित करती है।
8. श्रम के लैंगिक विभाजन से आप क्या समझते है?लैंगिक विभाजन से आशय पुरुषों एवं महिलाओं के मध्य कार्य के विभाजन से है। कुछ कार्य विशेषकर घरेलू कार्य; जैसे-खाना बनाना, सिलाई करना, कपड़े धोना एवं सफाई करना आदि केवल महिलाओं द्वारा किए जाते हैं, जबकि पुरुष कुछ विशेष प्रकार के कार्य करते हैं।

निबन्धात्मक प्रश्न

1. भारत में लैंगिक मसले क्या है? इसके सुधार हेतु उचित सुझाव दीजिए।

परंपरागत रूप से समाज में महिलाओं को कमज़ोर वर्ग के रूप में देखा जाता रहा है। वे घर और समाज दोनों जगहों पर शोषण, अपमान और भेद-भाव से पीड़ित होती हैं। महिलाओं के खिलाफ भेदभाव दुनिया में हर जगह प्रचलित है। वैश्विक लैंगिक अंतराल सूचकांक- 2023 में भारत 146 देशों में 127वें स्थान पर रहा।

2. भारत में महिलाओं के राजनीतिक प्रतिनिधित्व की प्रगति की समीक्षा कीजिए।

संस्थानों की दुर्गमता: चुनाव रिकॉर्ड से पता चलता है कि अधिकांश राजनीतिक दल, हालांकि अपने संविधान में महिलाओं को पर्याप्त प्रतिनिधित्व प्रदान करने का वादा करते हैं, व्यवहार में महिला उम्मीदवारों को बहुत कम पार्टी टिकट देते हैं। एक अध्ययन में पाया गया कि महिलाओं का एक बड़ा वर्ग जिन्हें पार्टी का टिकट मिलता है, उनके पारिवारिक राजनीतिक संबंध हैं, या वे ‘वंशवादी’ राजनेता हैं। पहुंच के सामान्य मार्ग सीमित होने के कारण, ऐसे कनेक्शन अक्सर महिलाओं के लिए प्रवेश बिंदु होते हैं

महिलाओं के जीतने की संभावना कम होने की धारणा: राजनीतिक हलकों में अभी भी यह व्यापक रूप से माना जाता है कि महिला उम्मीदवारों के पुरुषों की तुलना में चुनाव जीतने की संभावना कम है, जिसके कारण राजनीतिक दल उन्हें कम टिकट देते हैं।

चुनौतीपूर्ण संरचनात्मक स्थितियाँ: भारत में चुनाव अभियान अत्यधिक मांग और समय लेने वाला है। पारिवारिक प्रतिबद्धताओं और बच्चों की देखभाल की ज़िम्मेदारियों के साथ महिला राजनेताओं को अक्सर पूरी तरह से भाग लेने में कठिनाई होती है

अत्यधिक असुरक्षित: महिला राजनेताओं को लगातार अपमान, अनुचित टिप्पणियों, दुर्व्यवहार और दुर्व्यवहार की धमकियों का सामना करना पड़ता है, जिससे भागीदारी और चुनाव लड़ना बेहद चुनौतीपूर्ण हो जाता है।

महँगी चुनावी प्रणाली: वित्त पोषण भी एक बाधा है क्योंकि कई महिलाएँ आर्थिक रूप से अपने परिवारों पर निर्भर हैं। संसदीय चुनाव लड़ना बेहद महंगा हो सकता है, और एक मजबूत प्रतियोगिता लड़ने में सक्षम होने के लिए बड़े पैमाने पर वित्तीय संसाधनों की आवश्यकता होती है। अपनी पार्टियों से पर्याप्त समर्थन के अभाव में, महिला उम्मीदवारों को अपने अभियान के वित्तपोषण की व्यवस्था स्वयं करने के लिए मजबूर होना पड़ता है, यह एक बड़ी चुनौती है जो उनकी भागीदारी को रोकती है।

आंतरिक पितृसत्ता: एक घटना जिसे ‘आंतरिक पितृसत्ता’ के रूप में जाना जाता है, जहां कई महिलाएं राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं के बजाय परिवार और घर को प्राथमिकता देना अपना कर्तव्य मानती हैं।

3. जीवन के उन विभिन्न पहलुओं का जिक्र करें, जिनमें भारत में स्त्रियों के साथ भेदभाव होता है या वे कमजोर स्थिति में होती है।         

बहुत ही कम महिला उच्च शिक्षा ग्रहण करती हैं । लड़कियों के स्कूलों के परिणाम लड़कों की अपेक्षा अधिक अच्छे होते हैं परंतु अधिकतर माता-पिता लड़कियों को स्कूल से निकाल लेते हैं क्योंकि वह लड़के की शिक्षा पर पैसा खर्च करना अधिक अच्छा समझते हैं। इस प्रकार शिक्षा के आधार पर लड़कियों से भेदभाव होता है ‌।

4. हमारे देश में ‘धर्म निरपेक्ष’ राज्य से आप क्या समझते है? विवेचना कीजिए।

भारत की संविधान-सभा द्वारा भारत को एक धर्मनिरपेक्ष राज्य घोषित किया गया। इसका आशय यह है कि राज्य का कोई धर्म नहीं है और प्रत्येक नागरिक को अपनी इच्छानुसार किसी भी धर्म को मानने तथा उसका प्रचार करने की पूरी स्वतन्त्रता है। धर्म के आधार पर राज्य द्वारा नागरिकों में किसी प्रकार का भेदभाव नहीं किया जा सकता।

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