Chapter 5 उपभोक्ता अधिकार Class 10th SST Economics Book (RCSCE Question Bank 2024 Answer Key)

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Objective Questions

प्र.1 भारत में उपभोक्ता सुरक्षा अधिनियम लागू किया गया –

(अ) 1984 (ब) 1985 (स) 1986 (द) 1987 ( )

प्र.2 कौनसा उपभोक्ता त्रिस्तरीय तंत्र का स्तर नहीं है?

(अ) तहसील (ब) जिला (स) राज्य (द) राष्ट्रीय ( )

प्र.3 वस्तुओं और सेवाओं के लिये मानक प्रदान करता है –

(अ) भारतीय मानक ब्यूरो (ब) एगमार्क

(स) उपभोक्ता इन्टरनेशनल (द) फूड फोर्टिफिकेश ( )

प्र.4 असंगत को पृथक कीजिए –

(अ) राष्ट्रीय उपभोक्ता दिवस 24 दिसम्बर (ब) सूचना प्राप्त करने का अधिकार अक्टूबर-2005

(स) न्यूनतम खुदरा मूल्य (द) हॉलमार्क, एगमार्क, मानक शब्द चिह्न ( )

प्र.5 बाजार में हमारी भागीदारी उत्पादक और …………………………………… दोनों रूपों में होती है। (उपभोक्ता)

प्र.6 उपभोक्ता आन्दोलन का प्रारम्भ उपभोक्तओं के …………………………………… के कारण हुआ। (असंतोष)

प्र.7 …………………………………… के दशक में व्यवस्थित रूप से उपभोक्ता आन्दोलन का उदय हुआ। (1960)

प्र.8 …………………………………… ई. में संयुक्त राष्ट्र ने उपभोक्ता सुरक्षा के लिये संयुक्त राष्ट्र के दिशा-निर्देशों को अपनाया। (1985)

अति लघुत्तरात्मक प्रश्न

प्र.1 COPRA से आप क्या समझते हैं?कोपरा (COPRA) भारतीय कानूनी व्यवस्था में एक महत्वपूर्ण कानून है जिसकी पूरी रूप से उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा करने का उद्देश्य है।
प्र.2 सूचना का अधिकार अधिनियम भारत में किस वर्ष लागू हुआ?12 अक्तूबर, 2005
प्र.3 MRP पूरा नाम लिखिए।Maximum Retail Price
प्र.4 राष्ट्रीय उपभोक्ता दिवस कब मनाया जाता है?24 दिसंबर
प्र.5 ‘हॉलमार्क’ से आप क्या समझते हैं?हॉलमार्किंग (Hallmarking) प्रमाणित करता है कि बार या ज्वैलरी में उपयोग की जाने वाली धातु BIS(bureau of Indian standards), एक्रीडिएशन एजेंसी द्वारा निर्धारित मानक निर्देशों के अनुसार है।
प्र.6 ‘एगमार्क’ से आप क्या समझते हैं?एगमार्क (AGMARK) एक प्रमाणचिह्न है जो भारत में कृषि/खाद्य उत्पादों पदार्थों पर लगाया जाता है। जिन उत्पादों पर एगमार्क लगा हो, उनके बारे में आशा की जाती है कि वे उत्पाद कुछ निर्धारित मानकों पर खरे उतरते हैं
प्र.7 ‘क्लास एक्शन सूट’ से आप क्या समझते हैं?
प्र.8 उपभोक्ता विवादों के निपटारे हेतु त्रिस्तरीय न्यायिक तंत्र व्यवस्था के स्तर लिखिये।उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 उपभोक्ता विवादों के समाधान के लिए तीन स्तरीय अर्ध न्यायिक तंत्र की घोषणा करता है, जिनमें जिला आयोग, राज्य आयोग और राष्ट्रीय आयोग शामिल हैं।
प्र.9 ‘उपभोक्ता इन्टरनेशनल’ से आप क्या समझते हैं?

लघुत्तरात्मक प्रश्न

प्र.1 भारत में ‘उपभोक्ता आन्दोलन’ के कोई चार कारण लिखिये।अत्यधिक खाद्य कमी, जमाखोरी, कालाबाजारी, खाद्य पदार्थों एवं खाद्य तेल में मिलावट की वजह से 1960 के दशक में व्यवस्थित रूप में उपभोक्ता आंदोलन का उदय हुआ
प्र.2 उपभोक्ता के संदर्भ में चुनने का अधिकार क्या है?इसका अर्थ है, जहां भी संभव हो, प्रतिस्पर्धी मूल्य पर विभिन्न प्रकार की वस्तुओं और सेवाओं तक पहुंच सुनिश्चित करने का अधिकार। एकाधिकार के मामले में, इसका मतलब उचित मूल्य पर संतोषजनक गुणवत्ता और सेवा का आश्वासन पाने का अधिकार है। इसमें बुनियादी वस्तुओं और सेवाओं का अधिकार भी शामिल है।
प्र.3 RTI से आप क्या समझते हैं?मुख्य रूप से भ्रष्टाचार के खिलाफ 2005 में एक अधिनियम लागू किया गया जिसे सुचना का अधिकार यानी RTI कहा गया. इसके अंतर्गत कोई भी नागरिक किसी भी सरकारी विभाग से कोई भी जानकारी ले सकता है बस शर्त यह है की RTI के तहत पूछी जाने वाली जानकारी तथ्यों पर आधारित होनी चाहिए. हम किसी सरकारी विभाग से उसके विचार नही पूछ सकते.
प्र.4 ‘क्षतिपूर्ति निवारण’ के अधिकार से आप क्या समझते हैं?अक्सर उत्पादक अपने उत्पादों के बारे में झूठे वादे करते हैं। कभी भी किसी उत्पाद में कोई त्रुटि भी हो सकती है। यदि किसी उपभोक्ता को इनके कारण कोई क्षति होती है तो उसे क्षतिपूर्तिनिवारण का अधिकार होता है
प्र.5 ‘लोगो’ से आप क्या समझते हैं?एक ग्राफिक मार्क, चिह्न, या प्रतीक होता है जिसे सार्वजनिक मान्यता या अलग पहचान के लिए इस्तेमाल किया जाता है।
प्र.6 ‘जागरूक उपभोक्ता’ बनने हेतु हमें क्या सावधानियाँ रखनी चाहिये?विभिन्न वस्तुएं खरीदते समय हमें लोगों को जरूर देख लेना चाहिए क्योंकि इसे हमें चीज की गुणवत्ता के बारे में पता चलता है और हम सुनिश्चित होकर उसे ले सकते हैं, यह लोगों भारतीय सरकार द्वारा कुछ गुणवत्ता परीक्षकों को पास करने के बाद दिए जाते हैं
प्र.1 भारत में उपभोकता न्यायिक तंत्र व इसकी सीमा राशि में दर्शाइये?भारत में उपभोक्ता न्यायालयों के तीन स्तर हैं। जिला स्तर पर जिला उपभोक्ता विवाद निवारण फोरम या डीसीडीआरएफ 20 लाख रुपये से अधिक का दावा नहीं करते हैं। है। राज्य स्तर पर राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग 20 लाख से अधिक है लेकिन 1 करोड़ रुपये से अधिक नहीं  मौजूद है और राष्ट्रीय स्तर पर शीर्ष उपभोक्ता न्यायालय 1 करोड़ रुपये से अधिक का, राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग है।
प्र.2 उपभोक्ता को प्राप्त किन्ही पाँच अधिकारों का उल्लेख कीजिये?सुरक्षा का अधिकार;सूचना पाने का अधिकार;चयन का अधिकार;सुनवाई का अधिकार; क्षतिपूर्ति निवारण  का अधिकार;उपभोक्‍ता शिक्षा का अधिकार प्रतिनिधत्व का अधिकार
प्र.3 उपभोक्ता संरक्षण हेतु सरकार के प्रयासों को स्पष्ट कीजिये?24 दिसंबर को भारत में राष्ट्रीय उपभोक्ता दिवस मनाया गया 1986 में इसी दिन भारतीय संसद ने उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम पारित किया और भारत उन देशों में से हैं जहां उपभोक्ता संबंधित समस्याओं के निवारण के लिए विशेष न्यायालय है, भारत में उपभोक्ता आंदोलन में संगठित समूह की संख्या और उनके कार्य वीडियो के मामले में कुछ तरक्की की है आज देश में 2000 से ज्यादा अधिक उपभोक्ता संगठन है, उपभोक्ता के अधिकारों को मजबूती देने के लिए COPRA का वर्ष 2019 में संशोधन हुआ और अब इंटरनेट के माध्यम से खरीद भी शामिल थी,
प्र.4 ‘लोगो’ किसी उपभोकता हेतु किस प्रकार महत्वपूर्ण हैं?विभिन्न वस्तुएं खरीदते समय अपने आवरण पर लिखा अक्षरों में इसी एक मार्ग हॉल मार्क के लोगों को अवश्य देखा होगा। उपभोक्ता जब भी कोई वस्तु या सेवा खरीदा है तो यह लोगों और प्रामाणिक चिन्ह उन्हें अच्छे गुणवत्ता सुनिश्चित करने में मदद करता है, ऐसे संगठन जो प्रमाण पत्र को जारी करते हैं उत्पादकों द्वारा उनके श्रेष्ठ गुणवत्ता पालन करने की स्थिति में शब्द चिन्ह प्रयोग करने की इजाजत देते हैं, इन चिन्ह की वजह से हम खरीदी गई वस्तुओं की गुणवत्ता को लेकर कॉन्फिडेंस रहते हैं
प्र.5 किन कारणों की वजह से उपभोक्ता का शोषण होता है?जानकारी की कमी उपयोग की गई सामग्री, निर्माण तिथि, उत्पाद के खतरे और परिणाम आदि जैसी जानकारी की कमी होने से हो सकता है कि उपभोक्ता शोषण का एक सामान्य कारण बन जाये। अपर्याप्त बिक्री-पश्चात सेवा … कालाबाजारी … नकली माल … बड़े पैमाने पर मूल्य … मिलावट … मापन … विज्ञापन संबंधी धोखाधड़ी
प्र.6 उपभोक्ता के रूप में अपने कर्त्तव्य लिखिये।उपभोक्ता के कर्त्तव्य : उपभोक्ता जब कोई वस्तु खरीदता है तो यह आवश्यक है कि उस वस्तु की रसीद अवश्य ले लें एवं वस्तु की गुणवत्ता ब्रांड, मात्रा, शुद्रता, मानक, माप-तौल, उत्पाद या निर्माण की तिथि, उपभोग की अन्तिम तिथि गारंटी या वारंटी, पेपर, गुणवत्ता का निशान जैसे ISI. एगमार्क, बुलमार्क, हॉलमार्क (आभूषण) और मूल्य की दृष्टि से किसी प्रकार के दोष, अपूर्णया पाते हैं तो सेवाएँ लेते समय अतिरिक्त सतर्कता एवं जागरूकता रखें ।

निबन्धात्मक प्रश्न

भारत में उपभोक्ता आंदोलन का जन्म अनैतिक और अनुचित व्यवसाय कार्यों से उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा करने और प्रोत्साहित करने की आवश्यकता के फलस्वरूप हुआ। अत्यधिक खाद्य कमी, जमाखोरी, कालाबाजारी, खाद्य पदार्थों एवं खाद्य तेल में मिलावट की वजह से 1960 के दशक में व्यवस्थित रूप में उपभोक्ता आंदोलन का उदय हुआ। 1970 के दशक तक उपभोक्ता संस्थाएँ वृहत् स्तर पर उपभोक्ता अधिकार से संबंधित आलेखों का लेखन और प्रदर्शनियों को आयोजन करने लगी थीं। यह आंदोलन वृहत् स्तर पर उपभोक्ताओं के हितों के खिलाफ और अनुचित व्यवसाय शैली को सुधारने के लिए व्यावसायिक कंपनियों और सरकार दोनों पर दबाव डालने में सफल हुआ।

इसके लिए उपभोक्ता किसी उपभोक्ता समूह का हिस्सा बन सकता है। व्यक्तिगत स्तर पर भी उपभोक्ता कई तरीके से जागरूकता बढ़ा सकता है; जैसे पोस्टर, संपादक ने नाम पत्र, ब्लॉग, सोशल मीडिया पर कैम्पेन, आदि के द्वारा।

भारत में उपभोक्ताओं को समर्थ बनाने के लिए सरकार द्वारा कानूनी मापदंडों को लागू किया जाना चाहिए। 1986 के उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम द्वारा उपभोक्ताओं के अधिकारों के संरक्षण के लिए कई महत्त्वपूर्ण कदम उठाए गए। राष्ट्रीय, राज्य तथा जिला स्तर पर तीन स्तरीय उपभोक्ता अदालतों का निर्माण किया गया। सरकार के लिए जरूरी है कि वह इन अदालतों में आए मुकदमों की शीघ्र सुनवाई करे और दोषी उत्पादक या व्यापारी के खिलाफ कार्रवाई करे। पीड़ित उपभोक्ता को उचित मुआवजा दिलवाया जाए। उपभोक्ताओं की शिकायतों का शीघ्र निपटारा करवाने के लिए इन कानूनों को सख्ती से लागू किया जाना जरूरी है। सरकार कोशिश करे कि भारत में बननेवाली विभिन्न चीजों की गुणवत्ता की जाँच की जाए और उन्हें आई०एस०आई० या एगमार्क की मोहर लगाकर ही बाजार में बिकने के लिए भेजा जाए। सरकार बाजार में बिकनेवाली विभिन्न चीजों की जाँच करे कि वे सुरक्षा के मापदंड पूरे करती हैं या नहीं। ऐसी चीजों की बिक्री पर रोक लगा दी जाए जो सुरक्षा के मापदंड पूरे न करती हों। सरकार को कानून बनाकर जमाखोरी, कालाबाजारी आदि पर रोक लगाकर उपभोक्ताओं को शोषण से बचाना होगा। गरीब वर्ग के लोगों को कम कीमत पर आवश्यक वस्तुएँ उपलब्ध कराई जानी चाहिए। इन विभिन्न कानूनी मापदंडों का प्रयोग करके सरकार उपभोक्ताओं को अधिकारों को प्राप्त कराने में समर्थ बना सकती है।

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