Chapter 3 मुद्रा व साख Class 10th SST Economics Book (RCSCE Question Bank 2024 Answer Key)

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Objective Questions

प्र.1 बैंकों के ऋणों के औपचारिक स्त्रोतों की कार्यप्रणाली पर नियंत्रण करता है –

(अ) भारतीय रिजर्व बैंक (ब) सहकारी समितियां

(स) स्वयं सहायता समूह (द) राज्य सरकारें ( )

प्र.2 ऋण के औपचारिक स्त्रोत में शामिल नहीं है –

(अ) व्यावसायिक बैंक (ब) सहकारी समिति (स) नियोक्ता (द) ग्रामीण बैंक ( )

प्र.3 उधार देने का नवीनतम विकसित स्त्रोत है –

(अ) निजी बैंक (ब) स्वयं सहायता समू

(स) ग्रामीण बैंक (द) व्यावसायिक बैंक ( )

प्र.4 प्रो. मोहम्मद युनूस के संदर्भ में असत्य है –

(अ) वे बांग्लादेश में ग्रामीण बैंक के संस्थापक

(ब) 2006 में ‘शांति’ के लिए नोबल पुरस्कार से सम्मानित

(स) 2006 में ‘अर्थशास्त्र’ हेतु नोबल पुरस्कार से सम्मानित

(द) उपर्युक्त सभी ( )

प्र.5 बैंक जमा का कितना प्रतिशत हिस्सा नकद के रूप में अपने पास रखते है?

(अ) 5% (ब) 10% (स) 15% (द) 20% ( )

प्र.6 …………………………………… ऋण की लागत और ऋण का बोझ बढ़ाती है। (उच्च ब्याज दर)

प्र.7 बैंक …………………………………… पर देने वाले ब्याज से ऋण पर अधिक ब्याज लेते है। (जमाओं)

प्र.8 नवम्बर 2016 में …………………………………… व …………………………………… रूपये के करेंसी नोटों को अमान्य घोषित कर दिया गया। (500 / 1000)

प्र.9 मुद्रा स्टॉक …………………………………… के पास …………………………………… तथा बैंकों में मांग जमाओं से मिलकर मुद्रा स्टॉक बनता है। (जनता / करैंसी)

अति लघुत्तरात्मक प्रश्न

प्र.1 ‘नकदीहित लेन देन’ के कोई दो माध्यम लिखिए?चेक द्वारा भुगतान  इंटरनेट द्वारा ·
प्र.2 विमुद्रीकरण से क्या अभिप्राय है?आसान शब्दों में, विमुद्रीकरण वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा विमुद्रित नोट किसी भी प्रकार के लेन-देन के लिए कानूनी मुद्रा के रूप में स्वीकार नहीं किए जाते हैं. Demonetization 1st 1946 , 2nd 1978 3rd 8 November 2016
प्र.3 स्वयं सहायता समूह से आप क्या समझते हैं?स्वयं सहायता समूह ग्रामीण गरीब लोगों, विशेषकर महिलाओं के समूह हैं। इसका उद्देश्य उन्हें खुद को संगठित करने में मदद करना, उन्हें आर्थिक रूप से सहायता करना, उन्हें काम प्रदान करना और घरेलू मुद्दों सहित अन्य मामलों में उनकी मदद करना है।
प्र.4 ‘मांग जमा’ क्या होती है?मांग पर जमा डिमांड डिपॉजिट या चेकबुक मनी वाणिज्यिक बैंकों में डिमांड खातों में रखी गई धनराशि है।
प्र.5 भारत में करेंसी नोट किसके द्वारा जारी किये जाते है?भारत में वर्तमान में ₹10, ₹20, ₹50, ₹100 ₹200, ₹500, तथा ₹2000 मूल्यवर्ग के बैंकनोट जारी किए जाते हैं । इन नोटों को बैंकनोट कहा जाता है| क्योंकि ये भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा जारी किए जाते हैं ।
प्र.6 ‘भारतीय मुद्रा’ किस नाम से जानी जाती है?भारतीय मुद्रा का नाम भारतीय रुपया (आईएनआर) है । एक रुपया में 100 पैसे होते हैं । भारतीय रुपये का प्रतीक “₹” है ।
प्र.7 मुद्रा के कोई दो आधुनिक रूप लिखिए।मुद्रा के आधुनिक रूपों में मुद्रा – कागज के नोट और सिक्के शामिल हैं।

लघुत्तरात्मक प्रश्न

प्र.1 मुद्रा को विनिमय का माध्यम स्वीकार करने के कोई दो कारण लिखिए?मुद्रा देश की सरकार द्वारा हर जगह विनिमय के माध्यम के रूप में अधिकृत है। किसी देश की सरकार इसे प्राधिकृत करती है। भारतीय रिजर्व बैंक केंद्र सरकार की ओर से करेंसी नोट जारी करता है
प्र.2 आर्थिक गतिविधियों में बैंकों की क्या भूमिका है?पूंजी निर्माण व्यापार उद्योग एवं कृषि के अर्थ प्रबंधन तथा देश की आर्थिक सामाजिक नीतियों एवं कार्यक्रमों के कार्यान्वयन में उनकी भूमिका सर्वाधिक महत्वपूर्ण हैं ।
प्र.3 भारत में औपचारिक व अनौपचारिक साख के स्त्रोत के नाम लिखिए।औपचारिक स्त्रोत- (i) इसके अंतर्गत साख के वे स्त्रोत शामिल हैं जो सरकार द्वारा रजिस्टर्ड होते हैं। इन्हे सरकारी नियमों तथा विनियमों का पालन करना पड़ता है। उदाहरण -बैंक तथा सहकारी समितियाँ। (ii) इनका उद्देश्य लाभ अर्जित करने के साथ-साथ सामाजिक कल्याण भी है। (iii) ये सामान्यतः ब्याज का कम दर मांगते हैं। (iv) ये कोई अनुचित शर्त नहीं लगाते। (v) भारतीय रिजर्व बैंक इन स्त्रोत के कामों पर नजर रखती है। साख के अनौपचारिक स्त्रोत – (i) इसके अंतर्गत छोटी तथा छिट-कूट इकाइयाँ शामिल होती हैं जो सरकारी नियंत्रण से मुक्त होती है। ये स्त्रोत हैं -साहूकार, व्यापारी , नियोक्ता, रिश्तेदार और मित्र आदि। (ii) साख का निरिक्षण करने वाला कोई संगठन नहीं होता। (iii) इनका उद्देश्य सिर्फ लाभ कमाना है। (iv) ये ब्याज की ऊँची दर की माँग करते हैं । (v) ऊँची ब्याज दर के अतिरिक्त कई कठोर शर्ते लगाते हैं।
प्र.4 ऋण से आप क्या समझते हैं?ऋण वह धनराशि है जो एक निश्चित अवधि के लिए किसी उधारकर्ता द्वारा उधार ली जाती है और ब्याज (सालाना या मासिक ब्याज सहित) सहित वापस लौटाई जाती
प्र.5 ऋण के औपचारिक व अनौपचारिक स्त्रोतों में कोई दो अन्र लिखिए। 
प्र.6 नकदी रहित लेन देन के कोई दो कारण लिखिए, जिसमें इसे प्रोत्साहन दिया जाता है?एक पहल है जिसके अंतर्गत रोजमर्रा की वस्तुओं को खरीदने के लिए एक ग्राहक, विक्रेताओं को भुगतान नकद से करने के बजाय एक फीचर फोन (प्राथमिक मोबाइल फोन) के माध्यम से सीधे अपने बैंक खाते से करता है।
प्र.1 स्वयं सहायता समूह के कोई चार महत्व लिखिये?महिलाओं को सशक्त बनाते हैं और उनमें नेतृत्व कौशल विकसित करते हैं। अधिकार प्राप्त महिलाएंँ ग्राम सभा व अन्य चुनावों में अधिक सक्रिय रूप से भाग लेती हैं।  इस देश के साथ-साथ अन्यत्र भी इस बात के प्रमाण हैं कि स्वयं सहायता समूहों के गठन से समाज में महिलाओं की स्थिति में सुधार के साथ परिवार में उनकी सामाजिक-आर्थिक स्थिति में सुधार होता है और उनके आत्म-सम्मान में भी वृद्धि होती है। यह सूक्ष्म-उद्यमों की स्थापना में सहायता प्रदान करके कृषि पर निर्भरता को आसान बनाता है  
प्र.2 ग्रामीण क्षेत्रों में ‘औपचारिक’ ऋण स्त्रोत का विस्तार क्यों आवश्यक है? कारणों को स्पष्ट कीजिये।हमें भारत में ऋण के औपचारिक स्रोतों को बढ़ाने की ज़रूरत इसलिए है क्योंकि भारत में ग्रामीण परिवार की जरूरतों को केवल 50% औपचारिक ऋण स्रोतों द्वारा पूरा किया जाता है। बाकी के परिवारों की जरूरत अनौपचारिक स्रोतों से पूरी होती है। अनौपचारिक ऋणदाताओं की ब्याज की दरें बहुत अधिक होती है और यह कर्ज़दाताओं की आय बढ़ाने का काम करती हैं
प्र.3 क्या ऋण लेना बुरा है? अपने उत्तर के समर्थन में तर्क प्रस्तुत कीजिए। 
प्र.4 100, 200 व 500 रूपये के नोट देखिए व उन पर किस भारतीय विरास्त को दर्शाया गया है? बताइये।100 रुपये के नोट के पीछे गुजरात के पतन शहर में बसे रानी की वाव 200 रुपये के नोट के पीछे मध्य प्रदेश में बने सांची स्तूप की तस्वीर छपी हुई है महात्मा गांधी (नई) श्रृंखला में ₹500 मूल्यवर्ग के बैंकनोट के पृष्ठभाग पर भारतीय विरासत स्थल लाल किला भारतीय ध्वज सहित का चित्र है जो देश की विरासत स्थल को दर्शाता है ।
प्र.5 भारत में ‘ऋण’ व्यवस्था में क्या समस्याएँ है? लिखिये।उच्च ब्याज दरें अपर्याप्त ऋण उपलब्धता जटिल ऋण प्रक्रिया ऋण चुकौती की समस्याएं क्रेडिट जांच में असमानता सूक्ष्म वित्तीय सेवाओं की कमी अनौपचारिक ऋणदाताओं पर निर्भरता  
प्र.6 स्वयं सहायता समूह ‘औपचारिक साख स्त्रोत’ से किस प्रकार भिन्न है? स्पष्ट कीजिए।स्वयं सहायता समूह 15 से 20 गरीब ग्रामीणों विशेषकर महिलाओं का एक समूह है जो नियमित अंतराल पर नियमित रूप से धन एकत्र करते हैं। जब समूह के किसी सदस्य को धन की आवश्यकता होती है तो वह समूह से कम ब्याज दर पर ऋण प्राप्त कर सकता है। स्व-सहायता समूह ऋण के एक महत्वपूर्ण स्रोत के रूप में उभर रहे हैं क्योंकि: वे ऋण पर कम ब्याज लेते हैं साहूकार क्या शुल्क लेते हैं. बचत और ऋण से संबंधित सभी निर्णय समूह के सदस्यों द्वारा लिए जाते हैं। सदस्य अपनी दैनिक जरूरतों को पूरा करने के लिए समूहों से ऋण ले सकते हैं। यदि समूह की बचत नियमित है तो वे बैंक से ऋण भी ले सकते हैं। समूह के नाम पर ऋण स्वीकृत किया जाता है। ऋण की अदायगी की जिम्मेदारी समूह की है। वे उधारकर्ताओं को संपार्श्विक की समस्या से उबरने में मदद करते हैं। उन्होंने कर्जदारों को साहूकारों के चंगुल से मुक्त कराया है।

निबन्धात्मक प्रश्न

गरीबों के लिए स्वयं सहायता समूहों के संगठनों के पीछे मूल विचार गरीबों को अपना रोज़गार बनाने का मौका देना है। आत्मनिर्भर गुट कर्जदारों को ऋणाधार की कमी की समस्या से उबारने में मदद करते हैं । उन्हें समय अनुसार विभिन्न प्रकार के लक्ष्यों के लिए एक यथोचित ब्याज दर पर ऋण मिल जाता है। इसके अतिरिक्त यह गुट ग्रामीण क्षेत्रों के गरीबों को संघबद्ध करने में मदद करते हैं। इससे न केवल महिलाएं स्वावलंबी हो जाती हैं, गुट के नियमित बैठकों के ज़रिए लोगों को एक माध्यम मिलता है जहां वे तरह तरह के सामाजिक विषयों जैसे- स्वास्थ्य ,पोषण और हिंसा इत्यादि में चर्चा कर पाती है।

विशेषताऔपचारिक साख स्रोतअनौपचारिक साख स्रोत
संगठनात्मक संरचनासरकार द्वारा नियमित और लाइसेंस प्राप्त।कोई औपचारिक नियमन नहीं, अक्सर अनौपचारिक समूहों या व्यक्तियों द्वारा संचालित।
उदाहरणबैंक, वित्तीय संस्थान, सहकारी समितियाँ।साहूकार, दोस्त, परिवार, चिट फंड।
ब्याज दरेंप्रतिस्पर्धी और नियंत्रित, आमतौर पर कम।अनियंत्रित और अक्सर बहुत उच्च।
दस्तावेजीकरणव्यापक दस्तावेज़ीकरण और क्रेडिट जांच आवश्यक।सीमित या कोई दस्तावेज़ीकरण नहीं।
ऋण प्रक्रियालंबी और जटिल, क्रेडिट मूल्यांकन पर आधारित।त्वरित और सरल, अक्सर व्यक्तिगत संबंधों पर आधारित।
ऋण की सुरक्षाऋण की गारंटी के लिए आमतौर पर गारंटर या संपत्ति की आवश्यकता होती है।अक्सर गारंटर या संपत्ति की आवश्यकता नहीं होती, व्यक्तिगत विश्वास पर आधारित।
पहुँचशहरी और अधिक विकसित क्षेत्रों में अधिक, डिजिटलीकरण के साथ बढ़ती हुई पहुँच।ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में भी पहुँच, औपचारिक संस्थानों की अनुपस्थिति में महत्वपूर्ण।
उद्देश्यव्यापार विस्तार, शिक्षा, घर खरीदने जैसे विशिष्ट उद्देश्यों के लिए।तत्काल नकदी की आवश्यकता, छोटे व्यापारिक उद्यम, आपातकालीन वित्तपोषण जैसे अनौपचारिक उद्देश्यों के लिए।

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