विनिर्माण उद्योग Class 10th Geography Chapter 6 (RCSCE Question Bank 2024 Complete Solution)

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वस्तुनिष्ठ प्रश्न:

1. निम्न में से कौनसा उद्योग बॉक्साइट को कच्चे माल के रूप में प्रयोग करता है?

(अ) एल्युमिनियम प्रगलन (ब) कागज (स) सीमेंट (द) स्टील ( )

2. निम्न में से कौनसा उद्योग दूरभाष, कम्प्यूटर आदि संयंत्र निर्मि त करते है –

(अ) स्टील (ब) एल्यूमिनियम प्रगलन (स) इलैक्ट्रोनिक (द) सूचना प्रौद्योगिकी ( )

3. निम्न में से कौनसी एजेंसी सार्वजनिक क्षेत्र में स्टील को बाजार में उपलब्ध कराती है?

(अ) हेल  (ब) सैल  (स) टाटा स्टील (द) एम एन सी सी  ( )

4. निम्न में से कौनसा उद्योग चूना पत्थर को कच्चे माल के रूप में प्रयुक्त करता ह ै?

(अ) एल्यूमिनियम (ब) सीमेंट (स) प्लास्टिक (द) मोटर गाड़ी ( )

5. निम्न में से कौनसा आधारभूत उद्योग है –

(अ) लौह-इस्पात (ब) सीमेंट प्रगलन

(स) एल्यूमिनियम प्रगलन (द) उपर्युक्त सभी ( )

6. चीनी मिलों की सर्वाधिक सघनता किन राज्यों में है –

(अ) उत्तरप्रदेश व बिहार (ब) बिहार व महाराष्ट्र

(स) कर्नाटक व उत्तरप्रदेश (द) गुजरात व प ंजाब ( )

7. निम्न में से कौनसा कृषि आधारित उद्योग नहीं है –

(अ) पटसन उद्योग (ब) रबड़ उद्योग (स) सीमेंट उद्योग (द) चीनी उद्योग ( )

8. निम्न में से कौनसा शहर भारत की इलैक्ट्रोनिक राजधानी कहा जाता है –

(अ) मुम्बई (ब) बेंगलुरू (स) कोलकात्ता (द) चेन्नई ( )

9. निम्न में से कौनसा उपभोक्ता उद्योग है –

(अ) एल्यूमिनियम प्रगलन (ब) तांबा प्रगलन

(स) लौह-इस्पात (द) सिलाई मशीन ( )

10. हमारे देश में पहला सीमेंट उद्योग कारखाना लगाया गया था –

(अ) चेन्नई (ब) मुम्बई (स) कोलकात्ता (द) उदयपुर ( )

उत्तर:- 1. अ, 2. द, 3. ब, 4. ब, 5. अ, 6. अ, 7. स, 8. ब, 9. द, 10. अ

रिक्त स्थानों की पूर्ति  करो

11. 1950 के दशक में भारत तथा ……………………… ने लगभग एक समान मात्रा में इस्पात उत्पादित किया था।

(चीन)

12. भारत ……………………… को सूत का निर्यात करता है। (जापान)

13. कृषि तथा ……………………… एक दूसरे से पृथक नहीं है। (उद्योग)

14. भारत का पहला सीमेंट उद्योग सन् ……………………… में चेन्नई में स्थापित किया गया। (1904)

15. बैंगलुरू को भारत की ……………………… के रूप में जाना जाता है। (इलेक्ट्रॉनिक राजधानी)

अति लघुत्तरात्मक प्रश्न

आधारभूत उद्योग : ये भारी उद्योग हैं जो अन्य उद्योगों के लिए आधारभूत हैं। जैसे-लोहा तथा इस्पात उद्योग।

भारत की पहली सूती मिल बंबई में स्थापित की गई थी सूती मिल बॉम्बे स्पिनिंग एंड वीविंग कंपनी थी। स्थापना 7 जुलाई 1853

जिन उद्योगों की मालिकी सरकार की और संचालन भी सरकार द्वारा किया जाता हो तो उसे सार्वजनिक क्षेत्र के उद्योग कहते हैं । जैसे – रेलवे, डाक विभाग ।

स्वामित्व: उद्योगों को निजी क्षेत्र, राज्य के स्वामित्व वाले या सार्वजनिक क्षेत्र, संयुक्त क्षेत्र और सहकारी क्षेत्र में वर्गीकृत किया जा सकता है

उर्वरकों और कीटनाशकों के उपयोग जैसी कृषि गतिविधियाँ भूजल प्रदूषण का मुख्य कारण हैं। रासायनिक जल प्रदूषण: औद्योगिक और कृषि कार्यों में कई विभिन्न रसायनों का उपयोग होता है

सार्वजनिक क्षेत्र की एजेंसी जो भारत में स्टील के उत्पादन और विपणन के लिए जिम्मेदार है, वह सेल है, जो स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड के लिए है।

खनिज आधारित – लोहा तथा इस्पात, सीमेंट, एल्यूमिनियम, मशीन, औज़ार तथा पेट्रोरसायन उद्योग

पहला पटसन उद्योग कोलकाता के निकट रिशरा में 1855 में लगाया गया।

उद्योगों की अवस्थिति को प्रभावित करने वाले प्रमुख कारकों में संचार, परिवहन, भूमि, विद्युत, कच्चा माल, श्रम, पूँजी, बाजार, जल आदि को शामिल किया जाता है।

उपभोक्ता उद्योग जो उत्पादन उपभोक्ताओं के सीधे उपयोग हेतु करते हैं जैसे चीनी, दंतमंजन, कागज, पंखे, सिलाई मशीन आदि ।

(ii) प्रमुख भूमिका के आधार पर(क) आधारभूत उद्योग-लौह इस्पात उद्योग, सीमेंअ उद्योग। (ख) उपभोक्ता उद्योग-चीनी, कागज, पंखे तथा लाई मशीन आदि ।

जब कच्चे माल को मूल्यवान उत्पाद में बनाकर अधिक मात्रा में वस्तुओं का उत्पादन किया जाता है तो उस प्रक्रिया को विनिर्माण या वस्तु निर्माण कहते हैं।

द्वितीयक कार्यों में लगे व्यक्ति कच्चे माल को परिष्कृत वस्तुओं में परिवर्तित करते हैं। स्टील, कार, कपड़ा उद्योग, बेकरी तथा पेय पदार्थों संबंधी उद्योगों में लगे श्रमिक इसी वर्ग के अंतर्गत आते हैं।

कच्चा माल : कच्चे माल के उपयोग के आधार पर उद्योग कृषि आधारित, खनिज आधारित, समुद्र आधारित और वन आधारित हो सकते हैं। कृषि आधारित उद्योग कच्चे माल के रूप में वनस्पति और जंतु आधारित उत्पादों का उपयोग करते हैं।

लघुत्तरात्मक प्रश्न

इससे कृषि को आधुनिक बनाने में मदद मिलती है। इससे लोगों की आय के लिये कृषि पर से निर्भरता कम होती है। इससे प्राइमरी और सेकंडरी सेक्टर में रोजगार के अवसर बढ़ाने में मदद मिलती है। इससे बेरोजगारी और गरीबी दूर करने में मदद मिलती है। इससे निर्यात बढ़ता है जिससे विदेशी मुद्रा देश में आती है।

सड़क यातायात से होने वाला शोर ,विमानों से निकलने वाला शोर , रेलमार्ग या ट्रेनों से होने वाला शोर … , निर्माण-कार्य से होने वाला शोर

सार्वजनिक उद्योग – सार्वजनिक उद्योग में भारी तथा आधारभूत उद्योग सम्मिलित हैं । इनका संचालन सरकार स्वयं करती है । दुर्गापुर, भिलाई, राउरकेला के लोहा इस्पात केन्द्र सार्वजनिक उद्योग के उदाहरण हैं ।

निजी उद्योग – निजी उद्योग का संचालन किसी व्यक्ति द्वारा किया जाता है । इस उद्योग के संचालन एवं व्यवस्था की सारी जिम्मेदारियाँ एक व्यक्ति विशेष पर आधारित रहती हैं । इसके अन्तर्गत अधिकांश छोटे – छोटे उद्योग आते हैं ।

जल प्रदूषण से बचने के लिए नालों, कुओं, तालाबों और नदियों में गन्दगी न फैलाएं, सार्वजनिक जल वितरण के साथ छेड़छाड़ न करें, विसर्जन नियत स्थान पर करने के साथ , जल प्रदूषण सम्बन्धी सभी कानूनों का पालन करें

(i) जूट से बने कालीनों तथा टाट-बोरियों की माँग निरतर कम हो रही है।

(ii) जूट से बनी वस्तुओं का मूल्य अधिक होता है। इसलिए नियात बाजार में इन्हें कड़ी प्रतियोगिता का सामना करना पड़ता है।

(iii) कृत्रिम धागा सबन सामान के बढ़ते हुए प्रचलन ने भी जूट उद्योग के लिए समस्या उत्पन्न कर दी है।

देश में उत्तम कपास की कमी है। देश के विभाजन के कारण अच्छी कपास उत्पन्न करने वाले दो क्षेत्र (पंजाब का पश्चिमी भाग तथा सिन्ध) पाकिस्तान में चले – इस उद्योग को जापान, चीन, पाकिस्तान आदि देशों से कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ रहा है। इन देशों में लम्बे रेशे की कपास सुलभ होने तथा आधुनिक मशीनों एवं विधियों के प्रयोग के कारण उत्पादन लागत बहुत कम है।

आधारभूत उद्योग – जिनके उत्पादन या कच्चे माल पर दूसरे उद्योग निर्भर हैं जैसे – लोहा इस्पात, ताँबा प्रगलन व एल्यूमिनियम प्रगलन उद्योग । – • उपभोक्ता उद्योग जो उत्पादन उपभोक्ताओं के सीधे उपयोग हेतु करते हैं जैसे चीनी, दंतमंजन, कागज, पंखे, सिलाई मशीन आदि । पर की जाती है।

भारत में कृषि-आधारित उद्योगों के कुछ उदाहरण हैं डेयरी, पोल्ट्री, गन्ना, चमड़ा, रबर, जैव ईंधन, चावल मिलें, जूट, कागज, कपड़ा, सब्जी और फल प्रसंस्करण इकाइयाँ (अचार, जैम, चिप्स, आदि), चाय और कॉफी , वगैरह

लघुत्तरात्मक प्रश्न-

किसी भी देश के आर्थिक विकास के लिए लोहा एवं इस्पात उद्योग का विकास आवश्यक होता है। इस उद्योग की गणना महत्वपूर्ण उद्योगों में की जाती है। यह किसी भी राष्ट्र की अर्थव्यवस्था का आधार-स्तम्भ होता है। यह आधुनिक औद्योगिक ढाँचे का आधार और राष्ट्रीय शक्ति का मापदण्ड है।

कम कीमतों के कारण अतिरिक्त उत्पादन के समय में चीनी मिलों को नुकसान उठाना पड़ता है। उत्पादन की उच्च लागत: गन्ने की उच्च लागत, अकुशल तकनीक, उत्पादन की अनौपचारिक प्रक्रिया और भारी उत्पाद शुल्क के कारण विनिर्माण की लागत बढ़ जाती है। भारत में चीनी की उत्पादन लागत दुनिया में सबसे अधिक है

वे उद्योग जो खनिज व धातुओं को कच्चे माल के रूप में प्रयोग करते हैं, खनिज आधारित उद्योग कहलाते हैं। इन उद्योगों के उत्पाद अन्य उद्योगों का पोषण करते हैं। लौह अयस्क से बना लोहा खनिज आधारित उद्योग का उत्पाद है

(1) उद्योगों से उत्पादन में वृद्धि होती है, जिससे प्रति व्यक्ति आय में वृद्धि होती है और जीवन-स्तर उन्नत होता है। (2) रोजगार के साधनों में वृद्धि होती है तथा मानव संसाधन पुष्ट होते हैं। (3) राष्ट्रीय आय में वृद्धि तथा पूँजी का निर्माण होता है

पूंजी निवेश के आधार पर उद्योगों को इस प्रकार वर्गीकृत किया जा सकता है: (i) लघु उद्योग, (ii) बड़े पैमाने का उद्योग। अंतर : यदि किसी उद्योग में निवेश एक करोड़ रुपये से अधिक है तो उसे बड़े पैमाने का उद्योग माना जाता है। उदाहरण के लिए-लोहा और इस्पात उद्योग, सीमेंट उद्योग आदि। यदि किसी उद्योग में निवेश एक करोड़ रुपये से कम है, तो उसे लघु उद्योग माना जाता है। उदाहरणार्थ- प्लास्टिक उद्योग, खिलौना उद्योग आदि।

स्वामित्व के आधार पर उद्योगों को निम्न चार भागों में बाँटा जा सकता है

(1) निजी क्षेत्र के उद्योग-इन उद्योगों का स्वामित्व तथा संचालन या तो एक व्यक्ति द्वारा या व्यक्तियों के समूह द्वारा किया जाता है।

(2) सार्वजनिक क्षेत्र के उद्योग-इन उद्योगों का स्वामित्व तथा संचालन सरकार के हाथ में होता है।

(3) संयुक्त क्षेत्र के उद्योग-इन उद्योगों का स्वामित्व तथा संचालन सरकार एवं निजी उद्योगपतियों दोनों के हाथ में होता है।

(4) सहकारी क्षेत्र के उद्योग-इन उद्योगों का स्वामित्व और संचालन कच्चे माल के उत्पादकों या पूर्तिकारों, कामगारों अथवा दोनों द्वारा होता है।

हुगली नदी तट पर इनके स्थित होने के निम्न कारण हैं पटसन उत्पादक क्षेत्रों की निकटता, सस्ता जल परिवहन, सड़क, रेल व जल परिवहन का जाल, कच्चे माल का मिलों तक ले जाने में सहायक होना, कच्चे पटसन को संसाधित करने में प्रचुर जल, पश्चिम बंगाल तथा समीपवर्ती राज्य उड़ीसा, बिहार व उत्तर प्रदेश से सस्ता श्रमिक उपलब्ध होना

अप्रचलित मिलें और मशीनरी: जूट उद्योग अप्रचलित मिलों और मशीनरी की समस्या का सामना कर रहा है जिससे दक्षता तथा प्रतिस्पर्द्धात्मकता बढ़ाने के लिये तकनीकी उन्नयन की आवश्यकता है।

उद्योगों की अवस्थिति को प्रभावित करने वाले प्रमुख कारकों में संचार, परिवहन, भूमि, विद्युत, कच्चा माल, श्रम, पूँजी, बाजार, जल आदि को शामिल किया जाता है। उद्योग उन्हीं स्थानों पर केन्द्रित होते हैं जहाँ इनमें से कुछ या ये सभी कारक आसानी से उपलब्ध होते हैं।

रासायनिक उद्योग अपने स्वयं के सबसे बड़े उपभोक्ता हैं क्योंकि एक रासायनिक उद्योग का तैयार उत्पाद बड़े पैमाने पर अन्य रासायनिक उद्योग के लिए कच्चे माल के रूप में उपयोग किया जाता है। उदाहरण के लिए, एक फैक्ट्री नाइट्रिक या हाइड्रोक्लोरिक एसिड का उत्पादन कर रही है और उन एसिड का उपयोग फार्मास्युटिकल उद्योग में किसी न किसी तरह से किया जा सकता है

(i) उद्योगों को कृषि का योगदान-कृषि उद्योगों को कच्चा माल प्रदान करती है, जैसे जूट, कपास, गन्ना आदि ।

(ii) यह पूँजी निर्माण के साधन का काम भी करती है, जिसका उपयोग उद्योग में होता है।

(iii) यह औद्योगिक श्रमिकों को खाद्यान्न प्रदान करती है।

(iv) यह औद्योगिक उत्पादों के लिए अच्छा बाजार प्रदान करती है। कृषि को उद्योग का योगदान

(i) उद्योग कृषि को अनेक साधन प्रदान करता है। जैसे-उर्वरक, कीटनाशक, ट्रैक्टर आदि।

(ii) यह अधिसंरचनात्मक सुविधाएँ प्रदान करता है।

(iii) यह कृषि के अतिरिक्त श्रमिकों को रोजगार देता है तथा कृषि पर दबाव कम होता है।

(iv) यह कृषि उत्पादों के बाजार मूल्य में वृद्धि करता है।

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