जल-संसाधन Class 10th Geography Chapter 3 (RCSCE Question Bank 2024 Complete Solution)

हम “जल-संसाधन” के सभी ऑबजेकटिव , छोटे ऐन्सर वाले प्रश्न और लघुतरात्मक और अति लघूत्तरात्मक प्रश्नों का जवाब देने वाले हैं , हम आपको इसके सोल्यूशंस के साथ साथ आपको इसका पीडीएफ़ फाइल भी अंतिम रूप से देंगे और आप राजस्थान बोर्ड क्लास 10th Samajik Vigyan Complete solution pdf 2024 जो की Shala darpan Class 10th pdf 2024 के द्वारा जारी किया गया पीडीएफ़ हैं , इसके सभी सवालों का जवाब आपको इस पोस्ट के जरिए मिलने वाला हैं , jal sansadhan class 10th rcsce question bank solution pdf, class 10th geography chapter 3 important questions,

वस्तुनिष्ठ प्रश्न:

1. पृथ्वी का कितने प्रतिशत भाग जल से घिरा है?

(अ) 1/4भाग (ब) 1/3भाग (स) 3/4 भाग (द) 3/2 भाग ( )

2. वर्तमान समय में भारत में कुल विद्युत का लगभग कितना प्रतिशत भाग जल विद्युत से प्राप्त है?

(अ) 20 भाग (ब) 21 भाग (स) 22 भाग (द) 25ः भाग ( )

3. विश्व में सबसे अधिक वर्षा कहाँ होती है –

(अ) केरल (ब) चेरापूंजी और मोसिनराम

(स) राजस्थान (द) उत्तराखण्ड ( )

4. कौनसा राज्य है जहाँ हर घर में छत वर्षा जल संग्रहण ढांचा का बनाना आवश्यक कर दिया है –

(अ) हरियाणा (ब) मेघालय (स) तमिलनाडु (द) कर्नाटक ( )

5. हीराकुंड बांध बनाया गया है –

(अ) महानदी (ब) कृष्णा (स) कावेरी (द) चम्बल ( )

6. भाखड़ा नांगल परियोजना बनाई गई है –

(अ) ब्रह्मपुत्र नदी पर (ब) सतलज-वयास नदी पर

(स) महानदी पर (द) गंगा नदी पर ( )

7. सरदार सरोवर बांध बनाया गया है –

(अ) महानदी (ब) दामोदर (स) नर्मदा नदी (द) कावेरी ( )

8. चिपको आंदोलन का संबंध है –

(अ) वृक्षारोपण (ब) स्थानीय स्वशासन

(स) शहरीकरण (द) औद्योगीकरण ( )

9. निम्न में से कौनसा युग्म सुमेलित नहीं है –

(अ) आनासागर-अजमेर (ब) पिछोला-जयपुर

(स) तालछापर-चूरू (द) फतहसागर-उदयपुर ( )

10. अपने समय की सबसे बड़ी कृत्रिम झील में से एक भोपाल झील बनाई गई –

(अ) 11वीं शताब्दी में (ब) 12वीं शताब्दी में (स) 13वी ं शताब्दी मे ं (द) 14वी ं शताब्दी मे ं ( )

उत्तर:- 1. स, 2. स, 3. ब, 4. स, 5. अ, 6. ब, 7. स, 8. अ, 9. ब, 10. अ

रिक्त स्थानों की पूर्ति  करो

1. अलवणीय जल हमें सतही अपवाह और …………………………………… स्त्रोत से प्राप्त होता है। (भौमजल)

2. जवाहर लाल नेहरू ने बहु-उद्देशीय परियोजनाओं को …………………………. कहा है। (आधुनिक भारत के मंदिर)

3. भाखड़ा-नांगल परियोजना …………………………………… उत्पादन और …………………………………… दोनों के काम

आती है। (जल विद्युत व सिंचाई)

4. 2006 में …………………………………… और …………………………………… में भारी वर्षा के दौरान बांधों से जल छोड़ा

गया। (महाराष्ट्र/गुजरात)

5. …………………………………… में वर्षा जल अगली वर्षा ऋतु तक संग्रहित किया जा सकता है। (टांका)

अति लघुत्तरात्मक प्रश्न

मेघालय में, बाँस ड्रिप सिंचाई विधि प्रचलित है

घरेलू काम के लिए ज्यादा से ज्यादा जल बचा सकते हैं और इस पानी को कपड़े साफ करने, खाना पकाने, घर साफ करने तथा नहाने के उपयोग में लाया जा सकता है। बड़े-बड़े कल-कारखानों में स्वच्छ जल को इस्तेमाल कर बर्बाद किया जाता है। ऐसे में वर्षा जल का संचयन करके उपयोग में लेना जल सुरक्षित करने का बेहतरीन उपाय है।

पहाड़ी इलाकों में रहने वाले लोगों द्वारा बनाए गए चैनलों के लिए गुल और कुल्स शब्द का उपयोग किया जाता है। वे सिंचाई के लिए बनाए गए हैं। गुल और कुल्स डायवर्सन चैनल हैं, जो अधिकतर हिमाचल प्रदेश राज्य में उपयोग किए जाते हैं।

वे सभी परियोजनाए जिसके द्वारा कई उद्देश्यों जैसे बाढ़ नियंत्रण, मृदा अपरदन पर रोक, पेय एवं सिंचाई हेतु जलापूर्ति, विद्युत उत्पादन, मत्स्य पालन, जल कृषि, वन्य जीव संरक्षण, पर्यटन इत्यादि की पूर्ति एक साथ हो जाती है बहुउद्देशीय परियोजना कहलाती है।

अलवणीय जल सतही अपवाह तथा भूमि स्रोत से प्राप्त होता है।

पृथ्वी का 71 प्रतिशत हिस्सा पानी से ढका हुआ है.

गुजरात

सुदर्शन झील

मनुष्य जल को विभिन्न कार्यों में प्रयोग करता है। जैसे इमारतों, नहरों, घाटी, पुलों, जलघरों, जलकुंडों, नालियों एवं शक्ति घरों आदि के निर्माण में। जल का अन्य उपयोग खाना पकाने, सफाई करने, गर्म पदार्थ को ठंडा करने, वाष्प शक्ति, परिवहन, सिंचाई व मत्स्य पालन आदि कार्यों के लिये किया जाता है।

सन् 2025 में 20 करोड़ लोग जल की नितांत कमी झेलेंगे

थार मरुस्थल

लघुत्तरात्मक प्रश्न

पिछले पांच दशकों के दौरान सरदार सरोवर परियोजना नर्मदा घाटी के लोगों द्वारा तीव्र विरोध का केंद्र रही है, जो 1961 में परियोजना की नींव रखे जाने के साथ ही शुरू हो गया था। नर्मदा घाटी में प्रतिरोध आंदोलनों के एक लंबे सिलसिले ने अंत में शक्तिशाली जन आंदोलन का रूप लिया जो आज नर्मदा बचाओ आंदोलन से जाना जाता है

बढ़ती जनसंख्या से न सिर्फ सीधे रूप में जलस्रोत प्रभावित हो रहा है, बल्कि दूसरे प्राकृतिक संसाधनों का दुरुपयोग भी इसका कारण बन रहा है। जैसे उद्योग धंधे के लिए पेड़-पौधों की अंधाधुंध कटाई की जा रही है, जिससे पर्यावरण प्रदूषित हो रहा है। प्रत्येक वर्ष बारिश का औसत घटता जा रहा है और इससे भी भूमिगत जल प्रभावित हो रहा है।

भाखड़ा नांगल परियोजना

सरदार सरोवर बांध

कुल सिंचित क्षेत्रफल के लगभग आधे से अधिक भाग पर सिंचाई छोटे साधनों, जैसे – कुएँ, नलकूपों, तालाबों, झीलों, जलाशयों आदि की सहायता से की जाती है, जबकि शेष भाग की सिंचाई नहर जैसे बड़े साधनों के माध्यम से की जाती है।

राजस्थान के अर्द्ध शुष्क क्षेत्र में पुराने जमाने में जोहड़ ,खडीन ,बावड़ी और तालाबों में इकट्टा किया जाता था. बाद में चूनें के प्रयोग पर टांकें बना कर उसमे जल संग्रहण किया जाता हैं .

जलविद्युत शक्ति की सहायता से विद्युत उत्पादन स्थिर दर से होता रहता है। जल संरक्षण के लिए सिंचाई या अन्य गतिविधियों के लिए पीछे बने जलाशय का भी उपयोग किया जा सकता है। आवश्यकता पड़ने पर झील के भीतर पानी का निर्माण सुनिश्चित किया जाता है। जब बिजली उत्पादन के लिए पानी छोड़ा जाता है तो वे ऊर्जा भंडारण की सुविधा प्रदान करते हैं। बांधों से उत्पन्न बिजली  ग्रीनहाउस गैसों के उत्पादन को कम करती है।

ल संरक्षण एक अनिवार्य आवश्यकता है क्योंकि वर्षाजल हर समय उपलब्ध नहीं रहता अतः पानी की कमी को पूरा करने के लिये पानी का संरक्षण आवश्यक है। एक अनुमान के अनुसार विश्व में 350 मिलियन क्यूबिक मील पानी है। इसमें से 97 प्रतिशत भाग समुद्र से घिरा हुआ है।

(क) वर्षा- वर्षा जल का सबसे प्रमुख स्रोत है, वर्षा के जल का उपयोग कृषि-कार्यों में किया जा सकता है। वर्षा के जल का संरक्षण करके और उसका समुचित उपयोग करके जल की कमी को पूरा किया जा सकता है।(ख) नदियाँ- नदी भी जल का एक प्रमुख स्रोत है, नदियों के जल को आधुनिक तकनीक की मदद से शुद्ध करके उसे दैनिक जीवन में उपयोग किया जा सकता है। नदियों के जल को पाइप द्वारा खेतों तक पहुँचाकर फसलों का सिंचाई किया जाता है। नदियों के जल का उपयोग नदियों पर बाँध बनाकर किया जाता है। मैदानी इलाकों में ही नदियों से अधिकतर नहरें निकाली गयी हैं। पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश जैसे कम वर्षा वाले क्षेत्रों में नदी का उपयोग सिंचाई के लिए बहुत अधिक हुआ है।(ग) भूमिगत जल- यह भी जल का एक प्रमुख स्रोत है। भूमिगत जल को कुआँ खोदकर निकाला जाता है। भूमिगत जल को झरनों द्वारा भी प्राप्त किया जा सकता है। इस जल का उपयोग हम अपने दैनिक जीवन में करते हैं। इस जल की सहायता से कृषि कार्य किया जाता है।(घ)ग्लेशियर-यह भी जल-प्राप्ति का एक प्रमुख स्रोत है। गर्मियों में हिमालय का बर्फ पिघलकर नदियों के पानी को बढ़ाता है। इस जल की सहायता से दैनिक और कृषि कार्य किया जाता है।(ण) झील, तालाब एवं अन्य जलाशय- ये भी जल प्राप्ति का एक प्रमुख स्रोत हैं। इस जल का उपयोग हम अपने दैनिक जीवन में करते हैं। इस जल की सहायता से कृषि-कार्य और अन्य महत्वपूर्ण क्रिया-कलाप किए जाते हैं।

जोहड़ जोहड मिट्टी के छोट डैम की तरह होते हैं। वर्षा जल के बहाव क्षेत्र में बांध बनाकर इस पानी को रोका जाता है और छोटे तालाब के रूप में एकत्र कर लिया जाता है। नाड़ा या बंधा ये परंपरागत स्रोत थार के रेगिस्तान में मेवाड़ क्षेत्र में पाए जाते हैं। मानसून के दौरान बहते जल को एक नाली के रूप में पत्थर के बांध तक ले जाया जाता है जिसमें इस पानी को एकत्र किया जाता है बावड़ी राजस्थान जैसे सूखे इलाके में पानी को अधिक दिनों तक संरक्षित रखने और पशुओं को भी पानी की जद में लाने के लिए इन बावड़ियों का निर्माण किया गया। कुए से एक आदमी पानी निकाल कर पी सकता है

जल की प्रत्येक बूँद हमारे लिए कीमती है। इसे बचाने का प्रयास किया जाना चाहिए। औद्योगीकरण एवं शहरीकरण के कारण कुओं तथा तालाबों में लगातार कमी होती जा रही है और भूमिगत जल का स्तर गिर रहा है जो भविष्य में जल संकट का कारण बन सकती है। अत: जल संकट से बचने के लिए जल संरक्षण आवश्यक है। घरेलू स्तर पर जल का उचित व संयमित उपयोग एवं उद्योगों में पानी के चक्रीय उपयोग जल संरक्षण में सहायक हो सकते हैं इस्तेमाल किये हुए पानी का फिर से शौचालयों अथवा बगीचों में फिर से इस्तेमाल और रिसाइकिलिंग करके वर्षा-जल का संग्रहण करके हम पानी को बचा सकते हैं भूमिगत जल संरक्षण के लिए भूमिगत जल का कृत्रिम रूप से पुनर्भरण किया जा सकता है पकन टैंक/ड्रिप/स्प्रिंकल सिंचाई के उपयोग से सिंचाई जल के संरक्षण को बढ़ावा दिया जा सकता ह फसल उगाने के तरीकों का प्रबंधन करके;  हरों की तली व नालियों को पक्का करके

वे अपशिष्ट पदार्थों में औद्योगिक अपशिष्टों और अपशिष्टों का भी निर्वहन करते हैं और उन्हें प्रदूषित करते हैं। इससे पानी की गुणवत्ता में गिरावट आई है और इसके परिणामस्वरूप पानी की कमी हो गई है। क्योंकि औद्योगीकरण के कारण, पानी की भारी मात्रा का उपयोग अपनी आवश्यकता को पूरा करने के लिए उद्योग में किया जा रहा है

आज कल बाँध सिर्फ सिंचाई के लिए नहीं बनाए जाते अपितु उनका उद्देश्य विद्युत उत्पादन, घरेलू और औद्योगिक उपयोग, जल आपूर्ति, बाढ़ नियंत्रण, मनोरंजन, आंतरिक नौचालन और मछली पालन भी है। इसलिए बाँधों को बहुउद्देशीय परियोजनाएँ भी कहा जाता है जहाँ एकत्रित जल के अनेकों उपयोग समन्वित होते हैं।

जल संसाधन संरक्षण प्राचीन काल से किया जा रहा है इन परम्परागत विधियों में नाड़ी, बावड़ी, जोहड़, झालरा, टांका, टोबा, एनिकट आदि प्रमुख हैं।

हम यह जानते हैं कि शहरों में आबादी का दबाव निरन्तर बढ़ रहा है। शहरीकरण के कारण वाहित मल की बहुत बड़ी मात्रा प्रतिदिन उत्पन्न होती है। इतनी अधिक मात्रा में वाहित मल को उपचारित करने के लिए उपचार संयन्त्रों की संख्या पर्याप्त न होने के कारण अनुपचारित वाहित मल सीधे ही नदियों में छोड़ दिया जाता है जिससे जल-स्रोत प्रदूषित हो जाते हैं। शहरीकरण और आबादी की बढ़ती संख्या के पालन-पोषण हेतु उद्योग अनिवार्य है। उद्योगों की बढ़ती संख्या, इनसे निकलने वाले वर्ण्य पदार्थ वातावरण को प्रदूषित करते हैं।

निबन्धात्मक प्रश्न

बांस ड्रिप सिंचाई प्रणाली इतनी कारगर है की इसकी मदद से 200 फिट से भी अधिक दूर सिंचाई करने के लिए पानी को बहुत सरलता से ले जाया जाता है. बांस द्वारा बनाये गये इस नालियों में करीब 20 लीटर पानी लगभग 1 मिनट में झरनों से आता है और सैकड़ों फीट दूर खेत में सिंचाई करने के लिए ले जाया जाता है

Download Pdf

RCSCE Question Bank Class 10th Samaijk Vigyan 2024Download pdf
Download this answer Key as PdfDownload Now

Read also

Class 10th English RCSCE Question Bank Complete SolutionRead here
Class 10th Hindi RCSCE Question Bank Complete SolutionRead here
Class 10th Science RCSCE Question Bank Complete SolutionRead here
Class 10th Samajik Vigyan RCSCE Question Bank Complete SolutionRead here
Class 10th Mathematics RCSCE Question Bank Complete SolutionRead here
Class 10th Sanskrit RCSCE Question Bank Complete SolutionRead here